सोमनाथ के सद्भावना मिशन में उमड़ा जनसैलाब
मुख्यमंत्री का आह्वान : तुम मुझे साथ दो-मैं तुम्हे विकास दूंगा
स्वराज को सुराज्य में बदलने का सपना सद्भावना की समाजशक्ति द्वारा विकास का मार्ग अपनाने से पूरा होगा : मुख्यमंत्री
जूनागढ़ जिले के विकास के लिए 1245 करोड़ की घोषणा
7000 नागरिकों ने स्वेच्छा से मुख्यमंत्री के साथ किया उपवास
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मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्मजयंति पर सोमनाथ की धरती से स्वराज से सुराज्य की दिशा में जाने के लिए, तुम मुझे साथ दो-मैं तुम्हे विकास दूंगा का आह्वान किया। श्री मोदी ने कहा कि सद्भावना की समाजशक्ति से ही विकास के मार्ग पर चलकर स्वराज को सुराज्य में परिवर्तित करने का सपना साकार होगा। इस सन्दर्भ में उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आजादी की लड़ाई में दिए गए नारे, तुम मुझे खून दो-मैं तुम्हे आजादी दूंगा कि याद दिलवाई।
भारत की सांस्कृतिक अस्मिता के सोमनाथ तीर्थक्षेत्र में सोमवती अमावस्या के मौके पर श्री मोदी ने भगवान सोमनाथ के भक्तिभाव से दर्शन कर सद्भावना मिशन के संकल्प के रूप में एक दिवसीय उपवास किया। उन्होंने इस मौके पर जूनागढ़ जिले के लिए 1245 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की घोषणा की। उल्लेखनीय है कि एक माह पूर्व जूनागढ़ महानगर में सद्भावना मिशन उपवास के बाद उन्होंने जूनागढ़ शहर के लिए 1100 करोड़ के विकास कार्यों की घोषणा भी की थी।
पूरे दिन के दौरान सोरठ की धरती के कोने-कोने से जनसैलाब उमड़ पड़ा। मुख्यमंत्री ने अविरत समाजशक्ति के साक्षात्कार का अभिवादन किया। करीब 7000 जितने नागरिकों ने स्वेच्छा से मुख्यमंत्री के साथ उपवास किया।
श्री मोदी ने कहा कि उपवास की तपस्या में जनता के यह अपार आशीर्वाद मेरी संपूर्ण पीड़ा और यातना की अग्निपरीक्षा के दौरान मुझे शक्ति दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोमनाथ की धरती पर सद्भावना की शक्ति का सूरज उदय हुआ है। पहले सोमनाथ की धरती पर आतताइयों ने खून बहाकर इसे रक्तरंजित किया था। इसी सोमनाथ परिसर के विकास के लिए यहां के स्थानीय मुसलमानों ने अपनी जमीन दी है। लेकिन सद्भावना की यह ताकत कई लोगों को खटकती है। आजादी के लिए मर-मिटने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्मजयंति के मौके पर उन्हे याद करते हुए श्री मोदी ने कहा कि प्रत्येक युग में वीर पुरुष और महापुरुष पैदा होते हैं, लेकिन सुभाष चंद्र बोस को आजादी के बाद एक ही परिवार की भक्ति के लिए सत्ता सुख भोगने वालों ने भुला दिया है।
इस देश में दो राजनैतिक परंपराएं हैं। इनमें एक फूट डालो और राज करो की समाज को तोडक़र कुर्सी सलामत रखने की परंपरा है जबकि दूसरी राजनीतिक परंपरा है जो गुजरात ने अपनाई है, और वह है सबका साथ-सबका विकास। एकता, शांति और भाईचारे को समाज में जोडक़र विकास की यात्रा को गुजरात ने आगे बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भूतकाल में सत्ता सुख भोगने वालों ने कोई विकास की अवधारणा ही नहीं रखी थी, लेकिन हमने दस वर्ष में पूरी समृद्घि की दिशा ही बदल डाली। गुजरात में 1600 किलोमीटर का समुद्रीतट अब विश्व व्यापार से भारत की समृद्घि का प्रवेश द्वार बन गया है और 15 वर्ष में तो एक पूर्णत: नया गुजरात राज्य के समुद्री तट पर समृद्घि के हिलोरे लेगा। विकास की ऊंचाई किसको कहते हैं, यह वर्तमान गुजरात सरकार ने साबित कर दिखाया है।
श्री मोदी ने राज्य के विपक्ष की केन्द्रीय सल्तनत पर हमला करते हुए कहा कि गुजरात के सागरखेड़ु मछुआरों को पाकिस्तान की जेलों में बोट के साथ पकडक़र बंद कर दिया गया है, लेकिन उनकी यातना और परिवारों की पीड़ा का अहसास केन्द्र में सत्ता सुख भोग रही सरकार को नहीं है। क्योंकि उनके दिल में सद्भावना है ही नहीं, मात्र विरोध ही करना है। उन्होंने कहा कि हमें अखबारों में, मीडिया में जगह मिले या न मिले, हमारी जगह तो गुजरात की जनता के दिलों में है। छह करोड़ गुजरातियों ने हमें दिल में जगह दे दी है। अब हमें प्रसिद्घि या प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि, अब तो खुद पाकिस्तान के नागरिक विकास के मॉडल के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री को पाकिस्तान में आकर उद्बोधन करने का आमंत्रण देते हैं, यह क्या बतलाता है? गुजरात के विकास की प्रशंसा दुनिया में सब जगह पहुंची है, लेकिन जिन्होंने 40-40 वर्षों से गुजरात में सत्ता सुख भोगा है, वह बिना सत्ता के तड़प रहे हैं। जैसे बिना पानी के मछली तड़पती है, उसी तरह कांग्रेस के लोग बिना सत्ता के तड़प रहे हैं लेकिन विकास की प्रतियोगिता करने के बजाय वह झूठ फैला रहे हैं, अपशब्द बोल रहे हैं। लेकिन हमारी सद्भावना यह है कि वह मुझ पर जितना कीचड़ उछालेंगे उतनी ही आपकी पीड़ा शांत होगी। कमल तो और ज्यादा खिलने वाला ही है।
आज से 10-15 वर्ष पहले गुजरात के समाज को जातिवाद के जहर से तोड़ दिया गया था, वोट बैंक की राजनीति से सांप्रदायिकता का दानव गुजरात को वार-त्योहार पर गुजरात को लील जाता था। नया जन्म लेने वाला बालक मां बोलने के बजाय कफ्र्यू बोलना पहले सीखता था, जबकि आज दस वर्षों में शांति, एकता और भाईचारे की वजह से बालक को पता ही नहीं है कि कफ्र्यू क्या है। गुजरात ने अन्य राज्यों को भी यही मार्ग दिखलाया है।
श्री मोदी ने कहा कि, फूट डालो-राज करो की वोट बैंक की राजनीति ने निर्दोषों की बलि ली है। अब तो गुजरात के विकास के मोदी मॉडल को प्रगति के लिए सभी स्वीकार करते हैं। गुजरात की तरह एकता, शांति और भाईचारे की शक्ति का मार्ग ही सच्चा है। स्वामी विवेकानंद ने सोमनाथ की धरती पर भ्रमण किया था, इसका उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने विवेकानंद की 150वीं जन्मजयंति का वर्ष युवा वर्ष के रूप में मनाने और युवाओं को हुनर कौशल्य से प्रशिक्षित करने का संकल्प दोहराया।
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